बदायूं- सहसवान तहसील में जमीनों से जुड़े सनसनीखेज फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। ग्राम पंचायत सुजावली में फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए मृतक और गांव छोड़ चुके लोगों की जमीनों के बैनामे कराकर दाखिल-खारिज करा लेने का आरोप है।
मामले में CJM कोर्ट बदायूं के आदेश पर थाना सहसवान पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार हरीश चंद्र तत्कालीन नायब तहसीलदार अनगराज और लेखपाल अछेलाल समेत 8 नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
थाना सहसवान में अपराध संख्या 0493/2026 के तहत 22 सितंबर 2026 को BNS की धारा 318(4), 336(3), 337, 338 और 340(2) में FIR दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।
प्रधान ने SSP से की थी शिकायत फिर खटखटाया कोर्ट का दरवाजा
इस मामले के वादी सुजावली के ग्राम प्रधान ब्रह्मचारी पुत्र लक्ष्मी नारायण हैं। आरोप है कि उन्होंने 28 अक्टूबर 2025 को ही SSP बदायूं को दस्तावेजों के साथ पूरी शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने BNSS की धारा 173(4) के तहत कोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर किया। कोर्ट के आदेश पर अब जाकर पुलिस ने केस दर्ज किया है।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा तीन जमीनों का जिक्र एफआईआर में
पावड़ पुख्ता की जमीन मौजा पावड़ पुख्ता की गाटा संख्या 966, 967 और 975 के खातेदार राजपाल पुत्र हरनाम गांव छोड़कर जा चुके थे। आरोप है कि कुंवरपाल ने राजपाल के नाम का फर्जी आधार कार्ड बनवाया और खुद को राजपाल बताकर 28 जुलाई 2022 को अपनी पत्नी रामसनेही के नाम बैनामा करा लिया। कोर्ट ने मूलवाद संख्या 219/2022 में 25 फरवरी 2025 को इस बैनामे को निरस्त भी कर दिया था।
मृतक भूपाल के नाम पर बैनामा गाटा संख्या 1070 और 1067 के खातेदार भूपाल पुत्र डल्ली की मौत हो चुकी है। आरोप है कि लाला राम उर्फ लालू ने भूपाल के नाम पर फर्जी आधार बनवाकर किसी दूसरे व्यक्ति को भूपाल बनाकर खड़ा कर दिया और जमीन का बैनामा करा लिया।
अकबराबाद रोड की करोड़ों की जमीन ग्राम हरदत्तपुर की गाटा संख्या 11 जो अकबराबाद मेन रोड पर है जिसके मूल खातेदार राधेश्याम पुत्र दुर्गाप्रसाद थे, उसे भी फर्जी दस्तावेजों से आरोपी की पुत्रवधू रामा देवी पत्नी धर्मेंद्र यादव के नाम करा देने का आरोप है।
पुलिस अब रजिस्ट्री ऑफिस के रिकॉर्ड खतौनियां नामांतरण आदेश आधार कार्ड मृत्यु प्रमाणपत्र और कोर्ट के पुराने आदेशों का मिलान कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही तय होगा कि फर्जी दस्तावेज कैसे बने और दाखिल-खारिज में किसकी क्या भूमिका रही।
रिपोर्ट शाज़ेब खान चीफ एडिटर
