बरेली मंडल में मौत के सौदागर कैसे बदायूं-सहसवान में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे हैं अवैध अस्पताल प्रशासन मौन

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बदायूं-सहसवान में महिला की मौत के बाद जो हंगामा हुआ वो सिर्फ एक घटना नहीं है बल्कि बरेली मंडल में फल-फूल रहे अवैध अस्पतालों के काले साम्राज्य की पोल खोलता है। आनंदीपुर की महिला की मौत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कैसे बिना डिग्री वाले झोलाछाप डॉक्टर गरीबों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग आंखें मूंदे बैठा है।
सहसवान बना अवैध अस्पतालों का हब
स्थानीय लोगों की मानें तो सहसवान उझानी और बिल्सी क्षेत्र में 50 से ज्यादा निजी अस्पताल और क्लीनिक ऐसे हैं जिनके पास न तो CMO का रजिस्ट्रेशन है न फायर NOC न ही बायो-मेडिकल वेस्ट का लाइसेंस। एक कमरे में 2 बेड डालकर बाहर बड़ा सा बोर्ड लगा कर ये मौत की दुकानें चल रही हैं।
मॉडस ऑपरेंडी क्या है
1. गांव-देहात से दलालों के जरिए मरीज लाए जाते हैं।
2. कम फीस और जल्दी इलाज का लालच दिया जाता है।
3. बिना जांच-पड़ताल के ग्लूकोज और एंटीबायोटिक चढ़ा दी जाती है।
4. हालत बिगड़ने पर मरीज को बरेली या बदायूं के बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है, रास्ते में ही मौत हो जाती है।
स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ये अस्पताल चल कैसे रहे हैं? हर 6 महीने में CMO ऑफिस से जांच टीम आती है, लेकिन सिर्फ खानापूर्ति करके चली जाती है। सूत्रों की मानें तो हर अस्पताल से हर महीने की बंधी हुई रकम अफसरों तक पहुंचती है, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं होती।
क्या कहता है नियम
क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल चलाना गैर-कानूनी है। इसमें 5 लाख तक जुर्माना और अस्पताल सील करने का प्रावधान है। साथ ही अगर झोलाछाप डॉक्टर इलाज करते पाया गया तो उसके खिलाफ IPC की धारा 304 (लापरवाही से मौत) के तहत केस दर्ज हो सकता है।
प्रशासन ने क्या कहा
इस पूरे मामले पर जब *एसडीएम सहसवान शौर्य अरोड़ा* से बात की गई तो उन्होंने कहा, _”मामला संज्ञान में है, जांच कराई जा रही है। जो भी अस्पताल अवैध रूप से संचालित पाया जाएगा, उसे सील किया जाएगा और FIR दर्ज की जाएगी।
वहीं बदायूं सीएमओ से इस बारे में कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया।
लोगों की मांग
सहसवान की जनता ने जिलाधिकारी बदायूं से मांग की है कि पूरे क्षेत्र में संचालित सभी निजी अस्पतालों की सूची सार्वजनिक की जाए और जो बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं, उन पर बुलडोजर कार्रवाई की जाए, ताकि फिर किसी आनंदीपुर की महिला को अपनी जान न गंवानी पड़े।
बरेली जागरण इस मुहिम को जारी रखेगा। अगर आपके आस-पास भी कोई अवैध अस्पताल चल रहा है तो हमें फोटो/वीडियो भेजें।
रिपोर्ट शाज़ेब खान चीफ एडिटर