बदायूं- सहसवान का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व रखने वाला प्रसिद्ध सरोवर सरसोता आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जहाँ कभी राजाओं के पराक्रम की गाथा लिखी गई, आज वहाँ गंदगी का अंबार लगा है।क्या है पौराणिक मान्यता

मान्यता है कि प्राचीन काल में हैहय वंश के प्रतापी राजा सहस्त्रबाहू अर्जुन से युद्ध के दौरान भगवान परशुराम ने अपने फरसे से यहाँ प्रहार किया था। उनके प्रहार से ही इस सरोवर के सात स्रोत फूट पड़े थे और तभी से यह सरोवर सरसोता कहलाया। कहते हैं तभी से यहाँ स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और इसी आस्था के चलते यहाँ हर साल एकादशी पर विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु स्नान करने आते हैं। सहसवान नगर का नाम भी राजा सहस्त्रबाहू के नाम पर ही पड़ा माना जाता है।

लेकिन आज तस्वीर उलट है
हमारी टीम जब आज सरोवर पर पहुंची तो नजारा देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ। सरोवर के चारों ओर प्लास्टिक कचरा और गंदगी पसरी हुई है। जल में काई जमी हुई है, घाट टूटे-फूटे पड़े हैं। जो सरोवर कभी आस्था का केंद्र था, आज उपेक्षा का शिकार बन गया है।वहाँ मौजूद स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने बताया कि मेले से पहले भी सफाई नहीं कराई जाती। उन्होंने उपजिलाधिकारी सहसवान से मांग की है कि इस पौराणिक धरोहर की जल्द से जल्द साफ-सफाई कराई जाए इसका सौंदर्यीकरण किया जाए और इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए।
लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन ध्यान दे तो सरसोता सरोवर सहसवान की पहचान बन सकता है लेकिन अगर ऐसे ही छोड़ दिया गया तो हमारी आने वाली पीढ़ी इस ऐतिहासिक विरासत को खो देगी।
रिपोर्ट शाज़ेब खान चीफ एडिटर
